What is Freight Forwarding

24 Jan 2026 | Pravesh Shakya

फ्रेट फॉरवर्डिंग क्या है? (What is Freight Forwarding?)

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फ्रेट फॉरवर्डिंग क्या है? (What is Freight Forwarding?)

फ्रेट फॉरवर्डिंग एक ऐसी प्रोसेस है जिसमें एक एक्सपोर्टर या इमपोर्टर अपने माल को एक देश से दूसरे देश में भेजने के लिए किसी तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) को नियुक्त करता है, जो उसके लिए सभी लॉगिस्टिक्स, डॉक्यूमेंटेशन, शिपिंग, और कस्टम क्लीयरेंस का काम करता है। यह प्रोसेस बहुत जटिल हो सकती है — इसमें कई सरकारी नियम, शिपिंग लाइन्स, एयर फ्राइट, कंटेनर, ब्लॉक चेन, बिल ऑफ लेडिंग, इनवॉइस, कस्टम ड्यूटी, इन्स्योरेंस, और कई अन्य चीजें शामिल होती हैं।

फ्रेट फॉरवर्डर एक एजेंट के रूप में काम करता है — वह एक्सपोर्टर के लिए शिपिंग लाइन के साथ बातचीत करता है, कंटेनर बुक करता है, माल को लोड करता है, डॉक्यूमेंट्स तैयार करता है, कस्टम क्लीयरेंस करवाता है, और अंत में माल को डेस्टिनेशन पोर्ट तक पहुंचाता है।

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फ्रेट फॉरवर्डिंग का इतिहास (History of Freight Forwarding)

फ्रेट फॉरवर्डिंग की शुरुआत 18वीं सदी में हुई थी, जब व्यापारियों ने अपने माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए एजेंट्स का उपयोग करना शुरू किया था। उस समय, शिपिंग बहुत धीमी और खतरनाक थी — पाइरेट्स, तूफान, और कस्टम्स की जटिलताओं के कारण माल को सुरक्षित रूप से पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी।

इसलिए, व्यापारियों ने ऐसे लोगों को नियुक्त करना शुरू किया जो शिपिंग लाइन्स, पोर्ट अथॉरिटीज़, और कस्टम अधिकारियों के साथ बातचीत कर सकें। इन लोगों को "फ्रेट फॉरवर्डर्स" कहा जाने लगा।

आज, फ्रेट फॉरवर्डिंग एक ग्लोबल इंडस्ट्री बन चुकी है, जिसमें लाखों लोग काम करते हैं और अरबों डॉलर का कारोबार होता है। इंटरनेट और टेक्नोलॉजी के विकास के साथ, फ्रेट फॉरवर्डिंग भी बहुत तेज और ट्रांसपेरेंट हो गई है।

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फ्रेट फॉरवर्डिंग के प्रकार (Types of Freight Forwarding)

फ्रेट फॉरवर्डिंग के कई प्रकार होते हैं, जो माल के प्रकार, शिपिंग मोड, और डेस्टिनेशन के अनुसार अलग-अलग होते हैं।

1. एयर फ्राइट फॉरवर्डिंग (Air Freight Forwarding)

यह सबसे तेज शिपिंग मोड है, जिसमें माल को एयरप्लेन के जरिए भेजा जाता है। यह उन मामलों में उपयोगी होता है जहां समय की कमी होती है, जैसे कि पेरिशेबल गुड्स (फल, सब्जियां, दवाएं), हाई वैल्यू गुड्स (इलेक्ट्रॉनिक्स, ज्वैलरी), या एमरजेंसी शिपमेंट्स।

2. सी फ्राइट फॉरवर्डिंग (Sea Freight Forwarding)

यह सबसे सस्ता और सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला शिपिंग मोड है। इसमें माल को कंटेनर्स में लोड करके शिप के जरिए भेजा जाता है। यह बड़े मात्रा में माल भेजने के लिए उपयुक्त होता है, जैसे कि फैक्ट्री आउटपुट, कंसाइनमेंट, या गैर-उत्पादक गुड्स।

3. रोड फ्राइट फॉरवर्डिंग (Road Freight Forwarding)

 

यह शिपिंग मोड उन मामलों में उपयोगी होता है जहां माल को एक देश के अंदर या पड़ोसी देशों में भेजना होता है। इसमें ट्रक्स, लॉरियाँ, और वैन का उपयोग किया जाता है।

4. रेल फ्राइट फॉर्वर्डिंग (Rail Freight Forwarding)

भारत जैसे बड़े देशों में, रेल फ्राइट बहुत सस्ता और पर्यावरण अनुकूल होता है। रेल फ्राइट फॉर्वर्डिंग में माल को ट्रेन के जरिए भेजा जाता है।

5. मल्टीमॉडल फ्राइट फॉर्वर्डिंग (Multimodal Freight Forwarding)

यह एक से अधिक शिपिंग मोड्स का उपयोग करके माल को भेजने की प्रक्रिया है। उदाहरण के लिए — माल पहले ट्रक से पोर्ट तक लाया जाता है, फिर शिप में लोड किया जाता है, और अंत में डेस्टिनेशन पोर्ट से ट्रक या रेल के जरिए डेस्टिनेशन तक पहुंचाया जाता है।

6. एक्सप्रेस फ्राइट फॉर्वर्डिंग (Express Freight Forwarding)

यह एक प्रीमियम सर्विस है, जिसमें माल को बहुत कम समय में पहुंचाया जाता है। इसमें एयर फ्राइट, रोड फ्राइट, और एक्सप्रेस डिलीवरी सर्विस का उपयोग किया जाता है।

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फ्रेट फॉर्वर्डिंग के मुख्य घटक (Key Components of Freight Forwarding)

फ्रेट फॉर्वर्डिंग में कई घटक शामिल होते हैं, जो एक दूसरे से जुड़े होते हैं। इन घटकों को समझना बहुत जरूरी है:

1. शिपिंग लाइन (Shipping Line)

शिपिंग लाइन वह कंपनी होती है जो माल को एक पोर्ट से दूसरे पोर्ट तक ले जाती है। जैसे — Maersk, MSC, CMA CGM, Hapag-Lloyd, COSCO, आदि।

2. कंटेनर (Container)

कंटेनर एक बड़ा बॉक्स होता है, जिसमें माल को लोड किया जाता है। कंटेनर्स कई साइज के होते हैं — 20 फुट, 40 फुट, हाई क्यूब, फ्लैट रैक, ओपन टॉप, रेफ्रिजरेटेड (रीफर), आदि।

3. बिल ऑफ लेडिंग (Bill of Lading - B/L)

बिल ऑफ लेडिंग एक महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट है, जो माल के मालिक को माल की डिलीवरी का अधिकार देता है। यह शिपिंग लाइन और एक्सपोर्टर के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट भी होता है।

4. कस्टम क्लीयरेंस (Customs Clearance)

कस्टम क्लीयरेंस वह प्रक्रिया है, जिसमें माल को कस्टम डिपार्टमेंट से अनुमति ली जाती है। इसमें सभी आवश्यक डॉक्यूमेंट्स, जैसे कि इनवॉइस, पैकिंग लिस्ट, बी/एल, आदि की जांच की जाती है।

5. इनवॉइस और पैकिंग लिस्ट (Invoice and Packing List)

इनवॉइस माल की कीमत और विवरण दिखाता है, जबकि पैकिंग लिस्ट माल के पैकेजिंग और वजन की जानकारी देती है।

6. इन्स्योरेंस (Insurance)

माल को शिपिंग के दौरान नुकसान से बचाने के लिए इन्स्योरेंस किया जाता है। यह एक्सपोर्टर या इमपोर्टर के लिए वैकल्पिक या आवश्यक हो सकता है।

7. VGM (Verified Gross Mass)VGM ए

क महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट है, जो कंटेनर के वजन की पुष्टि करता है। यह शिपिंग लाइन के लिए आवश्यक होता है, ताकि शिप को सुरक्षित रूप से लोड किया जा सके।

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फ्रेट फॉर्वर्डिंग में शामिल डॉक्यूमेंट्स (Documents Involved in Freight Forwarding)

फ्रेट फॉर्वर्डिंग में कई डॉक्यूमेंट्स शामिल होते हैं, जो एक्सपोर्टर, इमपोर्टर, शिपिंग लाइन, कस्टम, और बैंक के बीच साझा किए जाते हैं।

1. कमर्शियल इनवॉइस (Commercial Invoice)यह एक्सपोर्टर द्वारा इमपोर्टर को जारी किया गया बिल होता है, जिसमें माल की कीमत, मात्रा, और अन्य विवरण होते हैं।

2. पैकिंग लिस्ट (Packing List)यह एक डॉक्यूमेंट है, जिसमें माल के पैकेजिंग, वजन, और डायमेंशन्स की जानकारी होती है।

3. बिल ऑफ लेडिंग (Bill of Lading)यह एक डॉक्यूमेंट है, जो माल की डिलीवरी का अधिकार देता है। यह शिपिंग लाइन और एक्सपोर्टर के बीच एक कॉन्ट्रैक्ट भी होता है।

4. सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (Certificate of Origin)यह एक डॉक्यूमेंट है, जो माल के देश की पुष्टि करता है। यह इमपोर्ट ड्यूटी में छूट या रिडक्शन के लिए आवश्यक होता है।

5. VGM (Verified Gross Mass)यह कंटेनर के वजन की पुष्टि करता है, जो शिपिंग लाइन के लिए आवश्यक होता है।

6. कस्टम क्लीयरेंस डॉक्यूमेंट्स (Customs Clearance Documents)इनमें शामिल हैं — इनवॉइस, पैकिंग

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